सिंगरौली को अब तक प्रदेश की ऊर्जा राजधानी के तौर पर पहचाना जाता रहा है, लेकिन जिले की खेती की तस्वीर भी बदल रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को बताया कि जिले के तीन हजार से अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं। उन्होंने कहा कि सिंगरौली की उपजाऊ ज़मीन पर प्राकृतिक खेती तेजी से फैल रही है।
मुख्यमंत्री सिंगरौली जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस मौके पर किसानों को अनंत चतुर्दशी की शुभकामनाएं भी दीं। उनका कहना था कि सामूहिक प्रयासों से सिंगरौली को एक अग्रणी कृषि जिला बनाया जाएगा और ऊर्जा राजधानी के साथ-साथ इसे प्राकृतिक खेती के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
किसानों से सीधी बातचीत, हल्दी की खेती पर खास चर्चा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जिले के प्रगतिशील किसानों से बात की। उन्होंने किसानों से उनकी प्राकृतिक खेती की पद्धति, श्रीअन्न के उत्पादन और खास तौर पर हल्दी की खेती के बारे में जानकारी ली। किसानों ने बताया कि जैविक खाद के साथ की जाने वाली प्राकृतिक खेती परंपरागत खेती के मुकाबले उन्हें ज्यादा फायदा दे रही है।
सोन और गोपद नदियों के संगम पर बसा सिंगरौली श्रीअन्न यानी मोटे अनाज के प्रमुख उत्पादक जिलों में है। यहां कोदो और सामा मुख्य फसलों में शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि सिंगरौली और डिंडौरी के किसानों की पहल पर ही सरकार ने कोदो-कुटकी को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का फैसला किया था।
सिंचाई से लेकर प्रशिक्षण तक, सरकार के ऐलान
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की सिंचाई क्षमता बढ़ाकर एक करोड़ हेक्टेयर तक ले जाई जाएगी। खाद्य प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जाएगा, वहीं एक जिला-एक उत्पाद पहल से स्थानीय उत्पादन को मजबूती दी जाएगी। यह सभी घोषित लक्ष्य हैं, जिन पर काम आगे बढ़ना बाकी है।
उन्होंने कहा कि पशुपालन और दुग्ध उत्पादन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा बनाया जाएगा। प्रदेश में कृषि उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करने के लिए खेती से जुड़े एक लाख किसानों, युवाओं और महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देने की बात भी उन्होंने कही।
जिले में नई इकाइयां, दिन में दस घंटे बिजली
मुख्यमंत्री के मुताबिक सिंगरौली के किसान अब परंपरागत खेती के साथ नई तकनीक और नई फसलें भी अपना रहे हैं। जिले में उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण की अच्छी संभावनाएं हैं। यहां आटा मिल, राइस मिल, तेल मिल, दुग्ध उत्पाद इकाइयां, बेकरी और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी कई नई इकाइयां शुरू हो चुकी हैं।
किसानों को दिन में दस घंटे बिजली देने के लिए जिले में फीडर सेपरेशन का काम पूरा कर लिया गया है। इससे खेती के कामों के लिए बिजली की उपलब्धता और बेहतर होगी। मुख्यमंत्री ने किसानों से फसल विविधीकरण अपनाने की अपील की और उद्यानिकी, प्राकृतिक खेती के साथ पशुपालन तथा मछली पालन से जुड़ने को कहा।
सिंगरौली में बलराम कृषि महोत्सव के मुख्य कार्यक्रम स्थल पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्रीमती राधा सिंह और सीधी-सिंगरौली सांसद डॉ. राजेश मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी किसानों को संबोधित किया। इस मौके पर सिंगरौली विधायक श्री रामनिवास शाह, विंध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री पंचूलाल प्रजापति, श्री कपिल यार्दे, श्री राम लल्लन सिंह, श्री जयपाल सिंह के साथ जिले भर से आए प्रगतिशील किसान और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
जिले के जो किसान प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी या कोदो-कुटकी की खेती की तरफ बढ़ना चाहते हैं, वे अपने विकासखंड के कृषि विभाग के अमले से संपर्क कर प्रशिक्षण और समर्थन मूल्य पर खरीदी से जुड़ी प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं।

