जुन्नारदेव विकासखंड के तराई और आसपास के गांवों में शुक्रवार को प्रशासनिक अमला सरकारी सेवाओं की जमीनी स्थिति जांचने पहुंचा। कलेक्टर हरेंद्र नारायन ने पुलिस अधीक्षक अजय पाण्डेय और विभागीय अधिकारियों के साथ स्कूल, आंगनबाड़ी, छात्रावास तथा स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाएं देखीं।

बच्चों की पढ़ाई और पोषण व्यवस्था की जांच

भाखरा के आंगनबाड़ी केंद्र एवं नर्सरी स्कूल में पोषण आहार वितरण और केंद्र संचालन की जानकारी ली गई। बच्चों से अक्षर, भाषा और अंक ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे गए तथा आंगन मिलन उत्सव पर उन्हें ड्राइंग शीट, पेंसिल और दूसरी शैक्षणिक सामग्री की किट दी गई।

प्राथमिक शाला भाखरा में चौथी और पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों से पर्यावरण और अंग्रेजी के प्रश्न पूछकर उनका शैक्षणिक स्तर परखा गया। कुछ बच्चों के उत्तर संतोषजनक नहीं मिलने पर शिक्षकों को पढ़ाई की गुणवत्ता और विद्यार्थियों का लर्निंग लेवल सुधारने के निर्देश दिए गए।

छात्रावास और स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाएं देखीं

शासकीय जूनियर आदिवासी बालक छात्रावास गोप में उपस्थिति पंजी, भोजन, पेयजल और साफ-सफाई सहित मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की गई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोपतराई में ओपीडी, टीकाकरण कक्ष, स्टोर और दवा वितरण कक्ष का निरीक्षण हुआ।

स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की उपलब्धता के साथ एंटी स्नेक वेनम की व्यवस्था की भी जानकारी ली गई। अधिकारियों से संस्थाओं के संचालन, हितग्राहियों को मिल रही सेवाओं और अभिलेखों के रखरखाव के बारे में पूछकर आवश्यक निर्देश दिए गए।

तराई शिविर में आवेदनों की विभागवार समीक्षा

ग्राम पंचायत तराई के खंड स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर में आसपास के गांवों के लोगों ने अपनी समस्याएं और मांगें रखीं। कलेक्टर ने आवेदनों के साथ सीएम हेल्पलाइन की लंबित शिकायतों की समीक्षा कर संबंधित विभागों को तय समय में कार्रवाई करने को कहा।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियुक्ति से जुड़े जन्म प्रमाण-पत्र के मामले, प्रधानमंत्री आवास योजना के काम और शिकायत को बिना तथ्यात्मक जांच दूसरे विभाग भेजने के प्रकरण में संबंधित अधिकारियों व कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। जुन्नारदेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के एक मेडिकल ऑफिसर से जुड़ी शिकायत में विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।

प्रशासन के अनुसार शिविर में मिली कई शिकायतों का मौके पर निराकरण किया गया। बाकी प्रकरण संबंधित विभागों को सौंपकर उनके समाधान के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है।